भर्जन तथा निस्तापन परिभाषा, उदाहरण, अंतर

भर्जन तथा निस्तापन का प्रयोग अयस्क से अशुद्धियां दूर करने के लिए किया जाता है, भर्जन तथा निस्तापन से पहले अयस्को का सांद्रण के बारे में पूर्ण रूप से अध्यन करना महत्वपूर्ण है। अयस्को का सांद्रण कर देने से धातु पूर्ण रूप से शुद्ध नही हो पाती है। सांद्रित अयस्को को अपचयन के प्रारूपों में परिवर्तित करना आवश्यक होता है, तभी अयस्को से पूर्ण रूप से शुद्ध धातु प्राप्त होती है।लेकिन सांद्रित अयस्क को सीधे अपचयन में परिवर्तित नही किया जा सकता है इसलिए उसको ऑक्साइड में परिवर्तित किया जाता है, धातु को ऑक्साइड में परिवर्तित करने के लिए भर्जन तथा निस्तापन का प्रयोग किया जाता है। उसके बाद ऑक्साइड आसानी से अपचित हो जाते है।

भर्जन

भर्जन के द्वारा सांद्रित अयस्क को वायु की उपस्थिति में गलनांक से अधिक ताप पर गर्म करके उनको ऑक्साइड में बदला जाता है। इस विधि का प्रयोग करना काफी आसान है। इसमें ऊष्मा के कारण अयस्क में उपस्थित अशुध्दिया वाष्प के रूप में बाहर निकल जाती है। इस विधि का प्रयोग मुख्य रूप से सल्फाइड अयस्क को ऑक्साइड में परिवर्तित करने के लिए किया जाता है। इसकी अभिक्रिया निम्नलिखित है।
                                     2Zns+3O₂→2ZnO+2SO₂
                                     2Cu₂S+3O₂→2Cu₂O+2SO₂

इस विधि का प्रयोग परावर्तनी भट्टी में किया जाता है अर्थात भर्जन की क्रिया करवाने के लिए अयस्क को परावर्तनी भट्टी में गर्म किया जाता है।

निस्तापन

निस्तापन के द्वारा सांद्रित अयस्क को वायु की अनुपस्थिति में इसके गलनांक बिंदु से कम ताप पर गर्म करके उनको ऑक्साइड में बदला जाता है
                                                           अर्थात
इस विधि में सांद्रित अयस्क को वायु की अनुपस्थिति में गर्म करने पर अशुध्दिया दूर हो जाती है। इसमें वाष्पशील पदार्थ निष्कासित होते है और धातु ऑक्साइड शेष रह जाते है।
इसमे अयस्क को परावर्तनी भट्टी में बाह्य पदार्थ तथा वायु की अनुपस्थिति में उसके गलनांक से नीचे ताप पर गर्म किया जाता है।
निस्तापन क्रिया के द्वारा सांद्रित अयस्क की नमी दूर हो जाती है तथा कार्बन पदार्थ की अशुद्धि नष्ट हो जाती है।
उदाहरण---
                      ZnCo₃(S)→ZnO(S)+CO₂
                      CaCo₃↦Cao+Co₂


भर्जन तथा निस्तापन में अंतर 

भर्जन निस्तापन
1. इसमें सांद्रित अयस्क को वायु की उपस्थिति
      में गर्म किया जाता है।
इसमें सांद्रित अयस्क को वायु की अनुपस्थिति
 में गर्म किया जाता है।
2. इसमें अयस्क ऑक्सीकृत हो जाते है। इसमें अयस्क से नमी निकल जाती है।
3. इसमें विषाक्तधातु और अम्लीय योगिक
    बाहर  निकलते है।
इसमें कार्बोन डाईऑक्साइड बाहर निकलती है।
4.  इसका उपयोग सल्फाइड अयस्कों
      को ऑक्साइड में परिवर्तित करने के
      लिए  किया जाता है।
इसका उपयोग कार्बोनेट जलयोजित ऑक्साइड
और हाइड्राऑक्साइड को ऑक्साइडों में
परिवर्तित करने के लिए किया जाता है।

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